Parliamentary panel recommends single independent drug controller for AYUSH medicines

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AYUSH मंत्रालय की दवाओं के लिए शक्तिशाली एकल स्वतंत्र नियामक की सिफारिश करते हुए, संसदीय समिति ने पारंपरिक चिकित्सा दवाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकीकरण को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। post

लोकसभा की स्वास्थ्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की है, जिसमें इसने पारंपरिक आयुष दवाओं (Ayurveda, Siddha, Unani, Homoeopathy) के लिए एक एकल स्वतंत्र ड्रग कंट्रोलर की स्थापना की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy (PCIM&H) और Central Council for Research in Ayurvedic Sciences (CCRAS) को मिलाकर एक संयुक्त और स्वायत्त नियामक निकाय बनाने की बात कही गई है, ताकि दवाओं की प्रभावकारिता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

समिति ने इसके पीछे मुख्य वजह यह बताई कि ग्राहकों की बढ़ती मांग, दवाओं के निगरानी की आवश्यकता और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मानकीकरण के लिए एक सशक्त, समन्वित प्रणाली बनाना अनिवार्य हो गया है।इसके अलावा, रिपोर्ट में Global Traditional Medicine Centre (Jamnagar, Gujarat) को कार्यशील बनाने पर भी बल दिया गया है।

इस पहल से पारंपरिक मेडिकल इंटरवेंशंस जैसे पंचकर्म, आयुर्वेदिक ओषधि, यूनानी फार्मूले और होम्योपैथिक दवाओं को सुरक्षा-आधारित रूप से वैज्ञानिक पैमाने पर मान्यता मिलेगी, जिससे AYUSH क्षेत्र में विश्वसनीयता बढ़ेगी और रोग निदान विस्तारित होगा।

यह सुझाव भारत में पारंपरिक चिकित्सा को न सिर्फ घरेलू स्तर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से मानकीकृत और सशक्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।