नए अध्ययन में आया आशाजनक परिणाम: आयुर्वेदिक घृत Alzheimer’s के ऐमी्लॉइड प्रोटीन को तोड़ने में सहायक

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Bose संस्थान की खोज बताती है कि “Lasunadya Ghrita” Alzheimer’s रोग में amyloid beta को विघटित करने में रासायनिक पेप्टाइड से भी बेहतर साबित हुआ। post

17 जनवरी 2025 को प्रकाशित एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन में यह सामने आया है कि एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि "Lasunadya Ghrita" (लसुनाद्य घृत) Alzheimer’s जैसे जटिल न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग में आशाजनक भूमिका निभा सकती है। इस शोध में कोलकाता स्थित Bose Institute के वैज्ञानिकों और IIT गुवाहाटी के बायोकैमिस्ट्री विशेषज्ञों ने मिलकर यह पाया कि Lasunadya Ghrita का पानी में घुलने वाला अंश (LG_WE) Alzheimer’s रोग के लिए ज़िम्मेदार amyloid beta (Aβ 40/42) प्रोटीन को विघटित करने की क्षमता रखता है। Amyloid beta फाइब्रिल का जमाव मस्तिष्क की नसों को क्षति पहुँचाता है, जिससे धीरे-धीरे याद्दाश्त और सोचने की क्षमता कम होती जाती है, जो Alzheimer’s की मुख्य पहचान है। शोधकर्ताओं ने पाया कि LG_WE न केवल इन प्रोटीन को इकट्ठा होने से रोकता है, बल्कि पहले से बने जहरीले ओलिगोमर्स को भी तोड़कर उन्हें छोटे और हानिरहित रूप में बदल देता है। इस प्रभाव की तुलना में रासायनिक पेप्टाइड्स (जो आमतौर पर वैज्ञानिक प्रयोगों में amyloid blockers के रूप में प्रयोग किए जाते हैं) भी कम प्रभावी साबित हुए। इस अध्ययन के निष्कर्ष Biophysical Chemistry (Elsevier) और Biochemistry (ACS) जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। शोध के निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि पारंपरिक आयुर्वेदिक फार्मुलों में मौजूद प्राकृतिक compounds आधुनिक न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में उपयोगी हो सकते हैं। यह शोध आयुष मंत्रालय और CSIR जैसी संस्थाओं द्वारा समर्थित है और इसे भारत के आयुष अनुसंधान क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आगे के क्लिनिकल ट्रायल भी सकारात्मक रहे, तो Lasunadya Ghrita एक सुरक्षित, पारंपरिक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित Alzheimer's उपचार विकल्प बन सकता है।