डायबिटीज़

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में HbA1c 7 से नीचे क्यों नहीं आ रहा post

डायबिटीज़ आज एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। बड़ी संख्या में मरीज यह सवाल पूछते हैं कि कभी-कभी शुगर रिपोर्ट ठीक आने के बावजूद HbA1c 7 से नीचे क्यों नहीं आ रहा। विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण यह है कि HbA1c केवल एक दिन की शुगर नहीं बल्कि पिछले दो से तीन महीनों की औसत ब्लड शुगर को दर्शाता है।

जब रक्त में शुगर बढ़ती है तो उसका एक हिस्सा हीमोग्लोबिन से जुड़ जाता है जिसे Glycosylated Hemoglobin या HbA1c कहा जाता है। यह जांच यह बताती है कि लंबे समय में ब्लड शुगर का नियंत्रण कितना प्रभावी रहा है।

स्वास्थ्य मानकों के अनुसार HbA1c 7 प्रतिशत से कम अच्छा नियंत्रण माना जाता है जबकि 6 प्रतिशत से कम बहुत अच्छा नियंत्रण माना जाता है। इसलिए प्रत्येक डायबिटीज़ मरीज का लक्ष्य HbA1c को 7 प्रतिशत से नीचे रखना होना चाहिए।

अक्सर मरीज यह समझ लेते हैं कि अगर सुबह की शुगर सामान्य है तो पूरा दिन शुगर नियंत्रित है। लेकिन ऐसा नहीं होता। दिन के अलग-अलग समय पर शुगर बढ़ने से HbA1c पर सीधा असर पड़ता है।

आदर्श शुगर स्तर इस प्रकार माने जाते हैं। खाली पेट शुगर 100 mg dL से कम। भोजन से पहले 120 mg dL से कम। भोजन के बाद लगभग 140 mg dL।

HbA1c को नियंत्रित करने के लिए केवल महीने में एक बार जांच पर्याप्त नहीं होती। अलग-अलग समय पर शुगर जांच करने से यह समझने में मदद मिलती है कि शुगर किस समय ज्यादा बढ़ रही है।

HbA1c नियंत्रण केवल दवाइयों से संभव नहीं है। इसके लिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम और दवाइयों का सही समय पर सेवन जरूरी होता है। कार्बोहाइड्रेट का संतुलन रखें। भोजन को छोटे हिस्सों में लें। प्रोटीन और फाइबर युक्त आहार शामिल करें। रोज कम से कम 30 से 40 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।

डायबिटीज़ प्रबंधन में जीवनशैली सुधार और चिकित्सकीय उपचार के साथ कुछ हर्बल सपोर्ट भी सहायक हो सकते हैं। Dibo Go डॉ. यजवेंद्र राणे द्वारा पारंपरिक वनस्पति ज्ञान और आधुनिक स्वास्थ्य समझ के आधार पर तैयार एक हर्बल फॉर्मूलेशन है जिसे ब्लड शुगर मैनेजमेंट में सहायक विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है। यह किसी भी नियमित चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है और इसे चिकित्सकीय सलाह के साथ ही लेना चाहिए।

निष्कर्ष रूप में HbA1c को 7 प्रतिशत से नीचे लाना संभव है लेकिन इसके लिए अनुशासन नियमित निगरानी और निरंतर प्रयास जरूरी हैं। डायबिटीज़ को डर की नहीं बल्कि समझदारी की जरूरत होती है।

डॉ. यजवेंद्र राणे
आर टी हॉस्पिटल नंदुरबार महाराष्ट्र